चंपावत ,
*मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए वन विभाग ने कसी कमर, चंपावत में अत्याधुनिक उपकरणों और जागरूकता अभियानों से रखी जा रही नजर*
*चंपावत में वन्यजीवों की निगरानी के लिए ड्रोन और कैमरा ट्रैप तैनात, सुरक्षा व्यवस्था हुई मजबूत*
जनपद में मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष को कम करना तथा स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना वन विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
इस संबंध में जानकारी देते हुए प्रभागीय वनाधिकारी श्री धिनो पुरुषोत्तमन ने बताया कि गुलदार एवं अन्य वन्य जीवों की गतिविधियों की सूचना मिलते ही विभागीय कर्मियों द्वारा तत्काल क्षेत्र में स्थलीय निरीक्षण कर गश्त की जाती है और स्थानीय ग्रामीणों को सतर्क व जागरूक किया जाता है। वन्यजीवों की सघन निगरानी के लिए ड्रोन कैमरा और कैमरा ट्रैप तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है।
वर्तमान में चंपावत प्रभाग में 64 कैमरा ट्रैप तथा 3 ड्रोन कैमरे क्रियाशील हैं, जबकि इस वर्ष 10 अतिरिक्त कैमरा ट्रैप क्रय किए जाने प्रस्तावित हैं।
प्रभागीय वनाधिकारी ने बताया कि आबादी वाले क्षेत्रों में वन्यजीवों के सुरक्षित रेस्क्यू के लिए विभाग के पास 2 ट्रेंक्यूलाइजिंग गन, 18 गुलदार रेस्क्यू पिंजड़े, 5 टाइगर रेस्क्यू पिंजड़े एवं 3 भालू रेस्क्यू पिंजड़े उपलब्ध हैं। इस वर्ष 5 नए गुलदार रेस्क्यू पिंजड़े भी खरीदे जा रहे हैं।
मानव-वन्यजीव संघर्ष न्यूनीकरण हेतु जिलाधिकारी महोदय चंपावत द्वारा वर्ष 2025–26 में 22.40 लाख रुपये की धनराशि प्रदान की गई थी, जिससे 5 गुलदार रेस्क्यू पिंजड़े, 2 बाघ रेस्क्यू पिंजड़े, 5 ततैया रेस्क्यू सूट, 1 ट्रेंक्यूलाइजिंग गन, 2 भालू रेस्क्यू पिंजड़े तथा रेस्क्यू किट क्रय किए जा चुके हैं।
धरातल पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ जनजागरूकता पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित रूप से जागरूकता गोष्ठियों का आयोजन किया जा रहा है, जिसके तहत सितंबर माह से अब तक 67 गोष्ठियां आयोजित की जा चुकी हैं।
इसके अतिरिक्त विभाग द्वारा झाड़ी कटान मशीनें भी क्रय की जा रही हैं और इस वर्ष 191.5 हेक्टेयर क्षेत्र में लैंटाना (कालाबासा) उन्मूलन का लक्ष्य रखा गया है।
प्रभागीय वनाधिकारी श्री धिनो पुरुषोत्तमन ने चंपावत जनपद की समस्त जनता से अपील करते हुए कहा है कि गुलदार से बचाव के लिए सभी नागरिक अपने घरों के आसपास साफ-सफाई रखें और घरों के चारों ओर पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था सुनिश्चित करें।
उन्होंने अभिभावकों से वृद्धजनों तथा बच्चों को कभी अकेला न छोड़ने का अनुरोध किया है। साथ ही पालतू जानवरों को मजबूत दरवाजे वाले कमरों में सुरक्षित रखने तथा रात के समय समूह में यात्रा करने व अपने साथ टॉर्च या प्रकाश की उचित व्यवस्था रखने का आग्रह किया है।
Jaya punetha editor in chief.




